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कर्मचारियों पर सख्त होती मोदी सरकार

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अब आने वाले दिनों मे मोदी सरकार को अपने सरकारी कर्मचारियों से भी मोर्चा लेने के लिए तैयार रहना होगा । वैसे अभी हाल मे सरकार ने अपनी तरफ से रणभेरी बजा दी है । एक आदेश मे 50 साल से ऊपर की आयु वाले कर्मियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा करने के आदेश पारित किये हैं । इसके लिए प्रत्येक विभाग मे समितियों का गठन किया जायेगा जो उनके कामकाज का मूल्यांकन करेंगी । जिन कर्मचारी व अधिकारियों का प्रदर्शन तय मानकों से कम होगा, उन्हें समय पूर्व रिटायरमेंट दे दिया जायेगा । वैसे तो सेंट्र्ल सिविल सर्विसेज रूल्स मे एफ.आर 56 (जे) एफ.आफ 56 (आई) रूल 48 (1) (बी) के तहत पहले से इसका प्रावधान है । लेकिन शायद ही किसी विभाग मे इसका उपयोग किया जाता रहा हो। लेकिन अब सरकार इसे गंभीरता से लागू करना चाहती है ।

इसके पूर्व भी सरकार कार्यालयों मे अनुशासन को लेकर कुछ सख्त कदम उठा चुकी है जिसे कर्मचारियों ने बेमन से स्वीकार तो कर लिया है लेकिन कहीं न कहीं वह मोदी सरकार के इन कदमों से नाराज भी हैं । अब सभी कार्यालयों मे बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम को लागू कर दिया गया है । जिससे विलंब से आना व जल्दी जाना संभव नही है । दिल्ली जैसे शहरों व दूसरे महानगरों मे जहां लोग काफी दूरी तय करके कार्यालय आते हैं, परेशानी अनुभव करने लगे हैं । कुल मिला कर मोदी सरकार के इन कदमों को कर्मचारी विरोधी माना जा रहा है ।

बात यहीं तक नही है । सातवां वेतन आयोग् सरकार के दरवाजे दस्तक देने लगा है । जनवरी 2016 से देय इस वेतन आयोग का इंतजार सरकार और कर्मचारी दोनो को है । इस संबध मे तरह तरह के कयास लगाये जा रहे हैं । सरकार की दूरदर्शिता व कार्यकुशलता की भी परीक्षा होगी । यह भी निर्णय हो जायेगा कि सरकार अपने कर्मचारियों को कितना खुश रख पाती है ।

अक्तूबर तक आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार को दे देनी है और फिर उसकी समीक्षा कर उसे जनवरी 2016 से लागू किया जाना है । इस रिपोर्ट के बारे मे कयास लगाये जा रहे हैं । कुछ बातें अभी से हवा मे तैरने लगी हैं । यह माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बहाने संभवत: मोदी सरकार उम्र दराज कर्मचारी व अधिकारियों को समय पूर्व रिटायरमेंट दे सकती है । इसके लिए वह ऐसी सिफारिश देने के लिए आयोग को पिछ्ले दरवाजे से कह चुकी होगी । 33 वर्ष की सेवा या 60 वर्ष किसी के भी पूरा हो जाने पर रिटायर कर देने की सिफारिश इस रिपोर्ट मे होने के कयास लगाये जा रहे हैं ।

युवा वोटरों को खुश करने की जिस चुहा दौड मे सभी राजनीतिक दल लगे हैं, भाजपा इस कदम से सभी को चित्त कर सकती है । इससे युवाओं मे यह संदेश जायेगा कि सरकार ने उन्हें रोजगार देने के लिए अपने बूढे हो रहे कर्मचारियों को घर भेजना ज्यादा उचित समझा । यह कदम राजनीतिक द्र्ष्टि से मोदी सरकार के लिए लाभ का सौदा होगा । वैसे भी भाजपा शासित राज्यों मे रिटायरमेंट की उम्र को बढाने की बजाय कम किया गया है । ऐसे मे केन्द्रीय कर्मियों के लिए भी यह संभावना बनती है ।

इन सभी संभावनाओं के मद्देनजर कर्मचारी संगठन भी कमर कसने की तैयारी मे हैं । वैसे भी कुछ कदमों से मोदी सरकार की छवि कर्मचारी विरोधी बनती जा रही है । ऐसे मे अगर आने वाले दिनों मे सरकार को अपने ही कर्मचारियों से मोर्चा लेना पडे तो कोई आश्चर्य नही ।

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 20, 2015

केद्रीय कर्मचारियों के लिए भले ही ये बुरी खबर हो पर  घर में  उनके युवा  बच्चों में बेरोज़गारी से उत्पन्न निराशा  अवश्य ख़त्म होगी ,और देश के यही हित में होगा ,आलेख में निष्पक्ष नजरिया सराहनीय है ,आभार आदरणीय बिष्ट जी .

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 20, 2015

धन्यावाद निर्मला जी । देखिए सातवें वेतन आयोग के पिटारे से क्या क्या निकलता है । इसका प्रभाव राज्यों पर भी पडता है क्योंकि वह भी इसी वेतन आयोग को लागू करते हैं । जैसा भी है देशहित पहले होना चाहिए ।

rameshagarwal के द्वारा
August 20, 2015

जय श्री राम बहुत अच्छा लेख लिखा विष्ट जी. बधाई.यदि हमें राष्ट्र को विश्व से स्पर्धा लीनी है तो कुछ कड़े फैसले लेने पड़ेगे.कांग्रेस ने वोट बैंक की वजह से कार्य संस्कृत को जो नुक्सान पहुचाया है उसको सुधरने के लिए मोदीजी की पहल देश हित में है हो सकता है और सम्भावना है की कर्मचारी विरोध करेंगे परन्तु देश हित में सही होंगे और जनता साथ देगी.

Shobha के द्वारा
August 21, 2015

श्री बिष्ट जी बहुत जानकारी भरा लेख सरकारी कर्मचारियों को सुविधा चहिये बदले में अपने काम के प्रति ईमानदारी भी चाहिए

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 24, 2015

अभिवादन रमेश अग्रवाल जी, आपने लेख पढ कर कमेंट के माध्य्म से अपने विचारों से अवगत कराया इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया । आशा है आपका यह स्नेहभाव बना रहेगा ।

SADGURUJI के द्वारा
August 24, 2015

आदरणीय विष्ट जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! सार्थक आवर विचारणीय लेख ! युवाओं को रोजगार देने की दृष्टि से देंखे तो पचास से ऊपर वालों को रिटायर होने का ऑफर देना बुरा नहीं है, परन्तु ये स्वेच्छिक होना चाहिए ! अच्छी प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई !

jlsingh के द्वारा
August 25, 2015

प्राइवेट कंपनियों में यह ब्यवस्था पहले से लागू है सरकारी संस्थाएं और दफ्तरों में यह नियम लागू होना ही चाहिए तभी फल अच्छा मिलेगा. पर संसद का क्या होगा? इस पर भी तो माननीयों को विचार करना चाहिए नो वर्क नो पे वहां भी लागू होना चाहिए! आप बहुत अच्छा लिखते हैं आदरणीय बिष्ट जी!

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 25, 2015

आदरणीय सिंह साहब, सादर अभिवादन । बीच मे तकनीकी खराबी के कारण संवाद न हो सका । मेरा यही मानना है कि देश हित मे अगर जरूरी हो सख्ती की जानी चाहिए । सरकारी दफ्तरों से सभी का काम पडता है । यह जरूरी है कि लोग समय पर आफिस आयें और काम भी करें । लेकिन जैसा आपने कहा यह भी जरूरी है कि माननीय अपने बारे मे भी तो सोचें । इधर संसद मे जो कुछ हुआ उस पर इन्हें स्वयं सोचना चाहिए कि आखिर इस आचरण से वह कैसे दूसरों को सही काम करने की नसीहत दे सकते हैं । सादर, सप्रेम ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 25, 2015

धन्यावाद गुरू जी । सही कहा आपने और मेरा भी विचार है कि युवा पीढी के मद्देनजर सही फैसला लिया जाना चाहिए ।


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