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मेरे सपनों..संघर्षों...बिखराव-टूटन व जुडने की अनवरत यात्रा..एक अनजाने , अनदेखे क्षितिज की ओर ।

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अतिवाद का शिकार होता महिला सशक्तिकरण

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महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों को लेकर  इधर जो प्रवृत्ति देखने  को मिली है उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि मर्ज बढता गया, ज्यों ज्यों दवा की | शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब महिला उत्पीडन, शोषण, बलात्कार आदि से संबधित खबर किसी अखबार के मुख्य पृष्ठ का हिस्सा न बने | मुख्य खबर के अलावा दर्जन भर ऐसी खबरों का अंदर के पन्नों पर छ्प कर मुंह चिढाना तो आम बात है | लेकिन अब आश्चर्य इन खबरों पर नही बल्कि इनको लेकर हो रही राजनीति, बयानबाजी व पाखंडपूर्ण प्रदर्शनों पर है | यह समस्या को एक अलग ही रंग और नजारे मे पेश कर रहे हैं | कोढ पर खाज यह कि महिलाओं से जुडी ऐसी खबरों के साथ मीडिया का व्यवहार भी अजीबोगरीब है | बल्कि अब तो ऐसा प्रतीत होने लगा है कि महिलाओं के हितों से किसी को उतना लेना देना नही जितना शोर मचाने और इसकी आड मे अपनी रोटियां सेकनें से है |

कैसे तिल को ताड बनाया जाता है, यह देखना हो तो महिला संबधित खबरों पर न्यूज चैनलों की भूमिका को देखिए | गैर जिम्मेदारी और व्यवसायिक स्वार्थ का ऐसा काकटेल अन्यत्र देख पाना संभव नही | सियारों की तरह सामुहिक आवाजें निकाल कर इन्होनें जिस सामाजिक परिवेश को तैयार किया है, आज उसका नतीजा दिखाई देने लगा है | ऐसा नही है कि महिला कानूनों का दुरूपयोग नही हो रहा लेकिन वहां बोलने का जोखिम कोई नही उठाना चाहता | बस जयकारे तक सारी सोच सीमित है | कभी कभी तो झूठी दुष्कर्म की खबरों पर भी इतना हल्ला मचा दिया जाता है कि मानो आसमान सर पर गिर गया हो | दो दिन बाद जब मामला उस किस्म का नही निकलता फ़िर एक चुप्पी साध ली जाती है |

रही सही कसर पूरी की हमारी राजनीतिक संस्कृति ने | एक मुश्त महिला वोटों को अपने पक्ष मे करने की राजनीतिक दलों की चुहा दौड ने भी एक पाखंडपूर्ण महिला जयकारे का ऐसा माहौल बनाया जिसमे सच को कहना , लिखना या विरोधी विचार रखना संभव नही रहा | लिहाजा सर्वत्र महिला हितों की कांव-कांव सुनाई देनी लगी है | परिणाम्स्वरूप आज जो परिवेश बना है उसमें आप महिलाओं के जयकारे के अलावा कुछ भी कहने का साहस नही जुटा सकते | सिर्फ़ जयकारा ही स्वीकार्य है | लेकिन विडंबना तो यह है कि एक तरफ़ जयकारे लगाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ दुष्कर्म की घटनाएं और उनकी विभत्सता बढती जा रही है | लेकिन ऐसा क्यों ? इस सवाल पर सब मौन हैं | किसी के समझ मे कुछ नही आ रहा |

अभी हाल मे दुष्कर्म को लेकर दिये गये एक बयान पर अदालत ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को अदालत मे हाजिर होने के लिए समन जारी किया है | उन्होने अपने बयान मे कहा कि एक महिला से चार लोग दुष्कर्म नही कर सकते | इसके कुछ दिन पूर्व दिल्ली मे आप पार्टी के नेता सोमनाथ भारती के बयान पर भी कुछ दलों और महिला संगठनों ने काफ़ी हो –हल्ला मचाया था | उन्होने कहा था कि दिल्ली पुलिस को हमारे अधीन कर  दें तो रात के 12 बजे भी खूबसूरत महिलाएं दिल्ली मे बिना किसी खौफ़ के घूम सकेंगी | इन बयान मात्र से दिल्ली का पारा यकायक बढ जाता है | नेतागिरी शुरू हो जाती है | ऐसा दो एक बार नही, बल्कि समय समय पर होता रहता है |

आज के सामाजिक-राजनैतिक हालातों को देख कर तो लगता है कि इस देश मे महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों के अतिरिक्त कोई दूसरी समस्या है ही नही | भ्र्ष्टाचार बढ्ता रहे, मिलावट से लोग मरते रहें, किसान आत्महत्या करते रहें, बुजुर्गों की सरेआम ह्त्या होती रहे, शिक्षा मंदिर लूट खसोट मे डूबे रहें इससे कोई फ़र्क नही पडता | इनसे जुडी खबरें न तो सत्ता के गलियारों मे बहस का विषय बनती हैं और न ही न्यूज चैनलों की चौपालों पर | लेकिन महिलाओं से जुडी उत्पीडन या दुष्कर्म की छोटी से छोटी खबर भी राजनीतिक भूकंप ला देने मे सक्षम है | ऐसे ही भूकंपों से दिल्ली कई बार दहल चुकी है |

यही नही, आप देश के अंदर इस्लामिक झंडे  शान से फ़हरा सकते हैं | पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने मे भी कोई बुराई नही | देश के दुश्मन आतंकवादियों को फ़ांसी की सजा न हो इसके लिए खुले आम समर्थन जुटा सकते हैं और फ़ांसी के विरूध्द सडकों पर उतर विरोध भी जता सकते हैं | ओवेसी जैसे इस्लाम के झंडाबरदार कुछ भी कहते रहें, किसी को कोई आपत्ति नही | कला के नाम पर हिंदु देवी-देवताओं के अश्लील चित्रों को बनाने मे भी कोई बुराई नही | धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदु संस्कृति व मान्यताओं का मजाक उडाने की भी पूरी छूट है | इन सबसे इस महान देश के महान लोकतंत्र को कोई फ़र्क नही पडता | लेकिन अगर किसी ने महिलाओं के जयकारे के अलावा कुछ अलग सा बोल दिया तो उसकी खैर नही | बस यही सबसे बडा अपराध है | इसके लिए आपके विरूध्द समन भी जारी हो सक्ता है | इसलिए इससे बचे रहें और बाकी मे लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आनंद लेते रहें |

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 26, 2015

श्री बिष्ट जी छुपी बात लेकिन सही बात” लेकिन अगर किसी ने महिलाओं के जयकारे के अलावा कुछ अलग सा बोल दिया तो उसकी खैर नही | बस यही सबसे बडा अपराध है | इसके लिए आपके विरूध्द समन भी जारी हो सक्ता है | इसलिए इससे बचे रहें और बाकी मे लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आनंद लेते रहें “

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 26, 2015

आदरणीय शोभा जी, त्वरित टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यावाद । इस डर से बहुत से पहलो खुल कर सामने नही आ पाते । लोगों को विरोध का भय रहता है जब्कि हर पहलू पर चर्चा की जानी चाहिए । सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 26, 2015

सियारों की तरह सामुहिक आवाजें निकाल कर इन्होनें जिस सामाजिक परिवेश को तैयार किया है, आज उसका नतीजा दिखाई देने लगा है | ऐसा नही है कि महिला कानूनों का दुरूपयोग नही हो रहा लेकिन वहां बोलने का जोखिम कोई नही उठाना चाहता | बस जयकारे तक सारी सोच सीमित है |———-ज्वलंत मुद्दों पर सटीक शब्दों की धार से अपनी बात रखना एक सच्चे लेखक की खुसूसियत होती है,और वो आप में है आदरणीय बिष्ट जी |दरसल ये निपट स्वार्थ नीति है फिर चाहे वो तिल का ताड बनाते न्यूज चैनल हों या ब्यान देते नेता हों,या आरक्षण की आग फ़ैलाने वाले संगठन हों ,मेरे विचार से इसे राजनीती कहना राजनीती का अपमान होगा ,राज नीति अब देखने को नहीं मिलती | सामयिक आलेख ,सादर .

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 28, 2015

निर्मला जी सादर अभिवादन व आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यावाद । मुद्दों पर निष्पक्ष व संतुलित लेखन का ही प्रयास रहा है । वैसे आज के माहौल मे इसके अपने खतरे भी हैं क्योंकि बहुत से लोग अपनी एक स्थायी सोच बना लेते हैं और उसमे भिन्न विचारों के लिए कोई स्थान नही रखते । बहरहाल यह बदलाव का दौर है । अभी बहुत से बदलाव अपनी दस्तक दे रहे हैं । उनका आना शेष है । सादर, सप्रेम ।

jlsingh के द्वारा
August 30, 2015

सही सोच के साथ आपके लेख हमेशा उत्कृष्ट रहे हैं और दैनिक जागरण का हिस्सा भी बने रहते हैं आपके स्वस्थ सोच को नमन!

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 31, 2015

सिंह साहब् सादर अभिवादन । लेख के संबध मे आपके यह दो शब्द मेरे लिए काफी महत्व रखते हैं । आप एक अच्छे लेखक ही नही बल्कि अच्छे पाठक भी हैं । ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है ।

sadguruji के द्वारा
September 5, 2015

आदरणीय विष्ट जी ! ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ सम्मान के लिए बधाई ! बहुत सार्थक और विचारणीय लेख ! आपका लेख पढ़कर एक शब्द याद आया ‘फिरकापरस्ती’ ! आज के समय में हम लोग एक गिरोह बनाकर ‘फिरकापरस्ती’ वाला स्वार्थी जीवन जी रहे हैं ! हमारे स्वार्थ के खिलाफ किसी ने कुछ बोला नहीं कि हो हल्ला मचाना शुरू ! आखिर में आपने आज के ‘फिरकापरस्त’ समाज की एक बहुत कड़वी सच्चाई बयान की है, “अगर किसी ने महिलाओं के जयकारे के अलावा कुछ अलग सा बोल दिया तो उसकी खैर नही |” आपके नए लेखों की जानकारी सुबह सुबह दैनिक जागरण से हो जाती है ! बस यूँ ही हिम्मत करके सच लिखते रहिये ! हार्दिक शुभकामनाओं सहित !

ashasahay के द्वारा
September 5, 2015

कोढ पर खाज यह कि महिलाओं से जुडी ऐसी खबरों के साथ मीडिया का व्यवहार भी अजीबोगरीब है | बल्कि अब तो ऐसा प्रतीत होने लगा है कि महिलाओं के हितों से किसी को उतना लेना देना नही जितना शोर मचाने और इसकी आड मे अपनी रोटियां सेकनें से है |—आदरणीय श्री बिष्ट जी,अगर मेरा मत भी कुछ महत्व रखता हो तो मैं कहूँगी कि आ पका उक्त कथनही सबसे बड़ा सत्य है।वैैसे आपके स्पष्ट विचारों के लिए बहुत बधाई।–आशा सहाय

ashasahay के द्वारा
September 5, 2015

कोढ पर खाज यह कि महिलाओं से जुडी ऐसी खबरों के साथ मीडिया का व्यवहार भी अजीबोगरीब है | बल्कि अब तो ऐसा प्रतीत होने लगा है कि महिलाओं के हितों से किसी को उतना लेना देना नही जितना शोर मचाने और इसकी आड मे अपनी रोटियां सेकनें से है |—आदरणीय श्री बिष्ट जी,अगर मेरे मत का कोई महत्व हो तो मैं आपके उपरोक्त कथन से सहमत हूँ।वैसे आपके आक्रामक एवं स्पष्ट विचारों के लिए बहुत बधाई। –आशा सहाय 

उदय शंकर ओझा के द्वारा
September 5, 2015

सत्य है , आज महिला सशक्तिकरण के नाम पर इस का उसी तरह दुरुपयोग हो रहा है या हो सकता है जैसे हमाकरे उत्तर प्रदेश मे एससी/एसटी एक्ट का होता रहा है - वोट बैंक की खातिर संभिधान के मूल भूत सिद्धांत को ही समाप्त कर दिया गया - समानता और बराबरी का अधिकार यह कैसे हुआ की एक को तो चलने को दिया जेट बीमान और दूसरे को बैसाखी ? अभी एक नेता ने कामसूत्र के विज्ञापन पर ऐतराज जताया तो उसे माफी मागनी पड़ी जबकि वह विज्ञापन अश्लीलता के अतिरिक्त कुछ नहीं पर अश्लीलता पर अंकुश लगाने के स्थान पर उस नेता पर ही अंकुश लगाया गया , क्यूँ ? कभी कभी मुझे लगता है की आज हम जिस दुनिया मे रह रहें है उस मे जिस की लाठी उस की भैंस का राज्य है और कुछ नहीं ।

aksaditya के द्वारा
September 5, 2015

बधाई बिष्ठ जी..

jlsingh के द्वारा
September 6, 2015

आदरणीय बिष्ट साहब, सादर अभिवादन के साथ ढेर सारी बधाइयाँ …आपके लेख की उत्कृष्टता को जरन ने पचना और आपको साप्ताहिक श्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान मिला. बहुत बहुत बधाई! ऐसे नए नए विषयों पर अपनी लेखनी को चमकाते रहें! आपका अभिनन्दन और वंदन भी! सादर!

Deepak Kapoor के द्वारा
September 6, 2015

Shri Bisht ji, Namaste! Nice and True Article, I think this is the reason that we are not noticing the changes in the society. Instead of expecting appreciation all the time, they must accept the reality also. Deepak Kapoor http://www.superawakening.com

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
September 6, 2015

साप्ताहिक सम्मान की हार्दिक बधाई आदरणीय बिष्ट जी .

yamunapathak के द्वारा
September 6, 2015

बिष्ट जी बहुत सुन्दर आलेख के लिए आभार बेस्ट ब्लॉगर के लिए बधाई

rameshagarwal के द्वारा
September 6, 2015

जय श्री राम विष्ट जी बहुत सटीक लेख लिखा आजकल टीवी डिबेट में महिला नेताओ को खूब दिखया जाता आप यदि कोई स्कूल लडकियो को मोबाइल बन कर दे या ज़ाँ पहन का आने को मन करे या लह्कोयो का पब में जा कर शराब पी कर वातावरण ख़राब करना यदि किसी ने आवाज़ उठाई बस समिझे मीडिया में बदनाम हो गया काका या सुन्दर कहना भी अपराध हो गया एक लडकी ने एक लड़के के साथ ट्राफिक स्टॉप पर बहस हो गयी लडकी ने लड़के को बहुत सुनाया फिर लड़ने लगी और पुलिस में शिकायत ३ दिन तक मीडिया में आई दिल्ली पुलिस ने इनाम घोषित किया बाद में पता चला लड़के के कुछ नहीं किया था मामला फर्जी निकला भगवन हमारे देश की रक्षा करे.

Deepak Kapoor के द्वारा
September 7, 2015

Thanks Bisht Ji A Real Story of the Society superawakening.com

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

धन्यावाद दीपक कपूर जी ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

रमेश अग्रवाल जी , अभिवादन । सही लिखा है आपने । इधर अब यही होने लगा है । अच्छा लगा जान कर कि आपको लेख पसंद आया । सादर, सप्रेम ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

यमुना पाठक जी सादर अभिवादन व हार्दिक धन्यावाद ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

आदरणीय सिंह साहब, आपकी बधाई व खूबसूरत शब्दों के लिए तहे दिल से शुक्रिया ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

आदरणीय ओझा जी सादर अभिवादन व कमेंट हेतु हार्दिक धन्यावाद । आपने बिल्कुल सही कहा है कि रोक उस पर लग रही है जो सच बोल रहा है । ऐसे मे एक तरफा माहौल बनाने के प्रयास भी हो रहे हैं । कुछ लोग हैं कि हवा की दिशा के अनुसार चलने बोलने मे ही अपनी बेहतरी समझ रहे हैं ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

आदरणीय आशा सहाय जी, सादर अभिवादन व बेहद प्रशन्नता हुई कि आपने मेरे लिए दो शब्द लिखे । आपके विचार मेरे लिए बेहद महत्व रखते हैं । उम्मीद है आपका सहयोग ऐसा ही बना रहेगा । सादर, सप्रेम ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 8, 2015

सदगुरू जी आपके दो शब्द ही मेरे उत्साह्वर्धन के लिए काफी हैं । सही कहा है आपने अब स्थिति यह है कि हम गिरोह बनाकर एक स्वार्थी जीवन जी रहे हैं । अपने स्वार्थ के प्रति बेहद संवेदंन शील हैं । एक अजीब स्थिति बन रही है ।

anilkumar के द्वारा
September 9, 2015

आदरणीय विष्ट जी , बहुत बहुत बधाई । उत्तम लेख के लिए और ब्गार आफ द विक के लिए भी । 

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 14, 2015

ध्न्यावाद अनिल कुमार जी आपको । कुछ कारणों से कमेंट दिखने मे विंलब हो जाता है । आशा है आप सानंद होंगे । सादर, सप्रेम


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