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क्रिकेट के हित मे नही बोर्ड की हठधर्मिता

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लोढा समिति की सिफारिशों को लेकर एक बार फिर क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड टकराव की राह पर है । बीसीसीआई ने जो रवैया अपनाना है इससे एक बात तो साफ हो ही गई है कि देश मे किसी भी क्षेत्र मे सुधार लाना अब इतना आसान नही रहा । क्रिकेट दूसरे खेलों की तरह महज एक खेल ही है लेकिन जिस तरह से इसमे पैसे और रूतबे का बोलबाला है उसने इसे भ्र्ष्टाचार और उठा पटक का एक ऐसा खेल बना दिया है जिससे कोई अलग नही होना चाहता । अब जब सभी इसमे रह कर अपने हित साधने के प्रयासों मे लगे हैं तो उन्हें इस खेल से अलग रखने का कोई भी प्र्यास उन्हें भला क्यों अच्छा लगने लगा । समस्या की मूल जड यही है

वैसे भारतीय क्रिकेट जिसे दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड भी कहा जाता है, विवादों के घेरे मे रहा है । खिलाडियों के चयन से लेकर , आई.पी.एल के सर्कस तथा राज्य संघों के साथ पैसे की बंदरबाट तक सभी कुछ मे सवाल उठते रहे हैं लेकिन इसमे काबिज खिलाडियों के खेल के आगे सभी नतमस्तक होते रहे । परिणामस्वरूप क्रिकेट बोर्ड की अमीरी और भ्र्ष्टाचार की कहानियां साथ साथ चलती रहीं ।

दर-असल पावर, पैसा और शोहरत का प्रर्याय बने क्रिकेट बोर्ड को लेकर देश मे तमाम चर्चाएं गर्म रही हैं ।आई.पी.एल. के क्रिकेट सर्कस ने कोढ पर खाज का काम किया । इसका परिणाम यह निकला कि क्रिकेट का यह संस्करण महज पैसे का तमाशा बन कर रह गया ।मैच फिक्सिंग व सट्टे के आरोपों के चलते इसकी रही सही साख भी खत्म होती गई । जनवरी 2015 को देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीसह आर.एस.लोढा की अध्यक्षता मे भारतीय क्रिकेट के हित के लिए कमेटी का गठन किया गया था 18 जुलाई को उसकी अधिकांश सिफारिशों को उच्चतम न्यायालय ने स्वीकार करते हुए लागू करने के आदेश पारित कर दिये थे । दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड अब सही रास्ते पर चल सकेगा, ऐसी उम्मीद की गई थी ।

सच तो यह है कि इधर कुछ वर्षों से बी.सी.सी.आई व राज्य क्रिकेट संघों पर कई कारणों से उंगुलियां उठने लगी थीं । मंत्रियों, नेताओं व खेल मठाधीशों के तमाम तिकडमों के चलते खेल ही खतरे मे पडने लगा था । इसका एक बडा कारण क्रिकेट बोर्ड मे कई लोगों का लंबे समय से काबिज रहना भी था और यह अपने पद व रसूख का इस्तेमाल करने मे इतने चतुर खिलाडी बन चुके थे कि कोई भी आसानी से इनके विरूधद जाने का साहस नही जुटा पा रहा था । कई ऐसे नाम हैं जिन्होने लंबे समय से भारतीय क्रिकेट को अपने गिरफ्त मे ले रखा है । अब इस फैसले से क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के इन मठाधीशों के अस्तित्व पर ही तलवार लटक गई है । यह सभी इस फैसले से हतप्रभ हैं । बेशक शुरूआती दौर मे दिखावे के तौर पर सभी ने इन सिफारिशों पर अपनी सहमति जताई लेकिन अब इसके विरूध्द एक्जुटता दिखाई दे रही है ।

इस समिति की क्रिकेट के हित मे जो बडी सिफारिशें हैं उनमे एक है कि बी.सी.सी.आई का पदाधिकारी बनने के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष की होगी । इसके साथ ही कोई मंत्री या सरकारी अफसर बोर्ड का पदाधिकारी नही बन सकता । कोई भी अधिकतम तीन कार्यकाल और कुल नौ वर्षों तक ही पदाधिकारी रह सकता है । किसी भी पदाधिकारी को लगातार दो से ज्यादा कार्यकाल नही मिलने चाहिए । यही नही, एक कार्यकाल पूरा होने के बाद कुल समय के लिए कूलिंग पीरिएड का भी प्रावधान है । यही नही, आई..एल. व बी.सी.सी.आई के लिये अलग अलग गवर्निंग काउंसिल की भी सिफारिश की गई है । इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण सिफारिश यह भी है कि एक राज्य का एक वोट होगा ।

बहरहाल, लोढा समिति की सिफारिशों ने कई पुराने दिग्गजों व मठाधीशों की नींद उडा दी है । अब कोई मंत्री या अफसर पदाधिकारी नही बन सकेगा । ऐसे मे कई दिग्गजों का जाना तय है । दो पद पर न रहने की सिफारिश की गाज भी कई महारथियों पर गिरेगी और उन्हें अपने रसूख मे कमी करने को मजबूर होना पडेगा । जो लोग लंबे समय से क्रिकेट संघों व बोर्ड मे काबिज रहे हैं उनकी विदाई लगभग तय है ।

कुछ महत्वपूर्ण फैसलों को समिति ने सरकार के पाले मे भी डाला है । इसमे एक महत्वपूर्ण फैसला बी.सी.सी.आई को आर.टी.आई के दायरे मे लाने और दूसरा सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने का है ।

इधर उच्चतम न्यायालय ने बीसीसीआई पर समिति की सिफारिशों को लागू करने का दवाब बनाया है लेकिन बोर्ड इन्हें लागू करने की बजाए इन्हें बाय पास करने के रास्ते तलाश रहा है । न्यायालय के आदेश के विरूध्द जाकर वार्षिक् आम बैठकें आयोजित कर ऐसे फैसले लिए जो इन सिफारिशों के विरूध है । वहीं दूसरी तरफ लोढा समिति ने न्यायालय को जो रिपोर्ट सौपी है उसमे सिफारिशों का उल्लघंन करने के लिए बोर्ड के सभी शीर्ष अधिकारियों को हटाने के लिए कहा गया है । बोर्ड को यह सिफारिशें इतनी नागवार गुजरी हैं कि बतौर धमकी वह आने वाली क्रिकेट सीरीज को रद्द करने की बात भी कहने लगा है । यही नही बोर्ड दवारा राज्य संघों को बडी धनराशि भुगतान करने के संबध मे भी कुछ फैसले लिये गये जिन्हें लोढा समिति ने सिफारिशों व न्यायालय के आदेशों के विरूध्द माना है । न्यायालय के अनुसार जब तक राज्य क्रिकेट संघ सिफारिशें मानने को तैयार न हों उन्हें धन आबंटित न किया जाए लेकिन अब बोर्ड का कहना है कि ऐसे हालातों मे देश मे आगे न तो कोई क्रिकेट सीरीज हो सकेगी और न ही घरेलू मैच क्यों कि बोर्ड उन्हें सिफारिशें मानने के लिए बाध्य नही कर सकता ।

बहरहाल बोर्ड पूरी तरह से इन सिफारिशों को किनारे करने के उद्देश्य से ट्कराव के रास्ते मे है और इसमे सरकार व खेल मंत्रालय को भी शामिल करने के प्रयास मे है । अब देखना है कि क्रिकेट के हित मे क्या होता है ? बोर्ड पर काबिज मठाधीश अपनी मर्जी लादने मे सफल होते हैं या फिर उच्चतम न्यायालय इन्हें सही रास्ते मे लाने मे सफल होता है । लेकिन इतना जरूर है कि महज कुछ लोग अपने स्वार्थों के लिए क्रिकेट को साफ सुथरा करना नही चाहते और अपनी मनमर्जी के लिए क्रिकेट के भविष्य को दांव पर लगाने मे भी पीछे नही दिख रहे ।

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
October 8, 2016

आपका लेख सामयिक है आदरणीय बिष्ट जी । दरअसल धन का अतिरेक ही भारतीय बोर्ड की मूलभूत समस्या है क्योंकि इसने लालच और भ्रष्टाचार को जन्म दे दिया है और विभिन्न रसूखदार लोग इसके पदों की ओर क्रिकेट के प्रति लगाव के कारण नहीं वरन धन की निरंतर प्रवाहित हो रही सरिता में डुबकी लगाने के लिए आकर्षित होते हैं । विगत बीस-पच्चीस वर्षों में यह अकूत धन तथा उससे उपजी राजनीतिक शक्ति का केंद्र बन गया है और यही वह शक्ति है जिसने इसे धृष्ट बना दिया है ।

rameshagarwal के द्वारा
October 8, 2016

जय श्री राम बीसीसीआई में बहुत गोरखधंधा और पैसा अधिकारी राजाओं की तरह रह रहे राजीव शुक्ल ने बहित गड़बड़ी की कांग्रेस के समय बहुत ज़मीन ले ली देखिये सर्वोच्च न्यायालय से भी भिड़ने के लिए तैयार और न्यायालय की विदेशो में बदनामी कर रहे इन्हें सबक मिलना चाइये लेकिन खेल का नुक्सान न हो सुन्दर लेख और विश्लेषण के लिए आभार.

sadguruji के द्वारा
October 9, 2016

आदरणीय विष्ट जी ! पठनीय और विचारणीय लेख प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई ! आपने बिलकुल सही कहा है कि कुछ लोग अपने स्वार्थों के लिए क्रिकेट को साफ सुथरा करना नही चाहते और अपनी मनमर्जी के लिए क्रिकेट के भविष्य को दांव पर लगाने मे भी पीछे नही दिख रहे । देखिये अब आगे क्या होता है, कोर्ट की चलती है या बोर्ड की ! सादर आभार !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 11, 2016

Jitendra Mathur ji hardik dhanyavad.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 11, 2016

bhut bhut dhanyavad shri ramesh agarwal ji. cricket bhi corrupt ho gaya hai.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 11, 2016

dhanyavad sadjuruji . ab dektai hai supreme court kitna kar paata hai.

Shobha के द्वारा
October 11, 2016

श्री बिष्ट जी क्रिकेट में इतना पैसा है इसी लिए राजनेता भी चोधरी बनने के लिए तैयार रहते हैं जम कर राजनीती होती है | क्रिकेट का इतना शोर शराबा रहता है जिससे दूसरे खेलों को पनपते ही नहीं है अति जानकारी से भरा लेख

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 14, 2016

हार्दिक आभार आदरणीय शोभा जी समय निकाल कर क्रिकेट पर लिखे मेरे ब्लाग् को पढने व मेरे उत्साहवर्धन के लिए ।


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